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घर वापसी (भाग ६- "वापस घर जाने की आस")

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भाग ६ (वापस घर जाने की आस)














भाग- १ यहाँ पढ़ें https://www.loverhyme.com/2018/05/blog-post_99.html 
भाग -२ यहां पढ़ें https://www.loverhyme.com/2018/05/blog-post_25.html
भाग ३ यहां पढ़ें https://www.loverhyme.com/2018/05/blog-post_72.html
भाग ४ यहाँ पढ़ें https://www.loverhyme.com/2018/05/blog-post_27.html
भाग ५ यहां पढ़ें https://www.loverhyme.com/2018/06/blog-post_13.html







न जाने इतना अपनापन क्यों महसूस होने लगा है। ... धीरे धीरे वापसी की उम्मीद होने लगी है।




कैलाश ने मुझसे रत्नेश का फ़ोन नंबर और एड्रेस लिया... रत्नेश ने फ़ोन नंबर बदल लिया था शायद ...किसी तरह उसका नया फ़ोन नंबर ढूँढ के वो ले आया और उसको कॉल लगाया।



रत्नेश की बस आवाज़ सुनके ही, मेरे दिल को तसल्ली हो चुकी थी कि कोई मेरा अपना, मेरा इंतज़ार कर रहा होगा... मुझे ढूंढ़ने की कोशिश तो ज़रूर की होगी उन्होंने ... मगर इस जगह पहुंच नहीं पाए होंगे।




बात करने का दिल तो था, पर समझ नहीं आया की बात कैसे करू. सो सिर्फ उनकी आवाज़ भर सुनके ही दिल खुश कर लिया। एक बार तो मैंने अपने बेटे की आवाज़ भी सुनी, उसी ने फोन उठाया था... बड़ा  हो गया है अब,…

What is Goodbye...afterall?

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What is goodbye afterall...if only it had to be just said, but not felt in the heart...when the memories drown you every now and then, making you vulnerable.

What is goodbye afterall...if you touch your scars and feel the pain again and again, like they are still fresh.

What is goodbye afterall...if your tears flow, eventhough times have crossed bridges of months and years.

What is goodbye afterall...when you try all the while to live, but die each day remembering them whom you love.

What is goodbye afterall...when you never think it would end so soon, that your mind keeps hanging in confusion.

What is goodbye afterall...when you remember them, each time you touch something you both shared.

What is goodbye afterall...when your playlist is full of their favourite songs, and you put them in loop, listening to each with tears in your eyes.

What is goodbye afterall...when the silence is full of their whisperings and, loneliness full of their memories.

What is goodbye afterall...when each…

घर वापसी (भाग ५ "उम्मीद का तोहफा")

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घर वापसी  (भाग ५  "उम्मीद का तोहफा")

भाग- १ यहाँ पढ़ें https://www.loverhyme.com/2018/05/blog-post_99.html 
भाग -२ यहां पढ़ें https://www.loverhyme.com/2018/05/blog-post_25.html
भाग ३ यहां पढ़ें https://www.loverhyme.com/2018/05/blog-post_72.html
भाग ४ यहाँ पढ़ें https://www.loverhyme.com/2018/05/blog-post_27.html








उस दिन तो कैलाश चला गया, पर उसका ये कहना कि वह मुझे इस दल-दल से निकालना चाहता है, कुछ देर के लिए अच्छा लगा सुनके। शायद मैं अपने परिवार के पास चली जाउंगी।पर ये सब इतना आसान नहीं जितना लगता है।



३ साल के इस सफर ने मुझे कितना पत्थर बना दिया , ये मुझे ही पता है। वो पहला दिन भी याद है मुझे, जब यहाँ लायी गयी थी.... धोखे से ! और फिर ज़ोर- ज़बरदस्ती से तिल-तिल कर के मारी गयी रोज़, तक तक...  जब तक कि इस पिंजरे के दरवाज़े खुले होने पे भी मैं यहाँ से भागने की कोशिश न कर सकूँ। 


अपना घर , परिवार छोड़ चुकी औरत पे तो हर कोई हक़ समझता है।सड़क पे होते हर उस शर्मनाक हादसे में औरत जीते- जी मरती है ... कुछ तो ये समाज उसकी ज़िन्दगी दुश्वार कर देता है और कुछ अपने ही लोग....



और यहाँ ....  चंद पैसो…

घर वापसी (भाग ४ -" ख़ामोशी का तूफ़ान")

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भाग ४ -" ख़ामोशी का तूफ़ान

भाग- १ यहाँ पढ़ें https://www.loverhyme.com/2018/05/blog-post_99.html 
भाग -२ यहां पढ़ें https://www.loverhyme.com/2018/05/blog-post_25.html
भाग ३ यहां पढ़ें https://www.loverhyme.com/2018/05/blog-post_72.html











५ दिन बीत गए... वो नहीं आया।  आया तो मेरी बला से ... मुझे क्या?  और हज़ारों हैं यहाँ आने वाले... पौधों को पानी देती-देती बड़बड़ा रही थी मैं।



गीले बालों में तौलिया लपेटे हुए... बारिश के मौसम की धूप का मज़ा ले ही रही थी, कि अफ़रातफ़री मच गयी। बुलबुल चहकती हुई वीना के कान में कुछ फुसफुसा रही थी।  वैसे भी उसे काम ही क्या !



"दीदी... वो आ गया फिर। " हौले से मेरे कान में बताने को वीना  दबे पाँव पहुंची थी।



"तो !!! मैं क्या करूँ?  जा के बोल दे उसे और अम्माजी से ... किसी और को भेज दें उसके स्वागत में, मुझे माफ़ करें ", मैं गुस्से में वीना से बोली।



"हाँ तो तुम्हे कौन मिलने आएगा ... नकचढ़ी लड़की! यहाँ जिसके ऊपर हाथ रखदूँ ना...पैसे निकाल के... खुद वो मेरे पैरों  में गिरेगी ", कैलाश के तीखे शब्द मेरे कानों को भेद रहे थे।



  गुस्से…

घर वापसी (भाग ३ "छुपे आंसूँ ")

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भाग ३  "छुपे आंसूँ "


भाग- १ यहाँ पढ़ें https://www.loverhyme.com/2018/05/blog-post_99.html 
भाग -२ यहां पढ़ें https://www.loverhyme.com/2018/05/blog-post_25.html







"आज भी पैसे बर्बाद करने आये हो?", मैं उसे छेड़ते हुए बोली।


"कुछ पुछूँ तो बताओगी?  उस दिन की तरह मूर्ति तो नहीं हो जाओगी?", कप रखते हुए, वो मेरी नक़ल उतारता हुआ बोला।


देखते ही मेरा लबों से हँसी फ़ूट पड़ी।  इतना हँसी इतना हँसी कि आँखें आंसुओं से भर गयी। मेरा हँसना कब रोने में बदल गया, मुझे भी पता न चला।


और कब उसके कंधे पे मेरा सिर और उसकी बाहें मुझसे लिपटी.... नहीं पता।  बस दरवाज़े को बंद करता, इक ज़ोर से धड़ाम की आवाज़ ने  हमे चौंका दिया। और अम्माजी बाहर से चिल्लाती हुुई निकली, "कम- से- कम ई दरवज्जा लगाय लेना था , चिटकनी नहीं का ... "


झट से उससे बाहें छुड़ा, मैं कमरे के दुसरे ओर जा पहुंची।


आज ये शाम  भी न जाने, कब दफ़ा होगी। खीझ सी होने लगी है इस बंद कमरे में।



"मेरा नाम नहीं पूछा तुमने अब तक। सोचा खुद ही बता दूँ। मेरा नाम कैलाश है। तुम्हारा क्या है?" ये बड़ा अजीब तरीका जान- पहचान  का।


घर वापसी ( भाग -२ "तनहा है खुद तन्हाई ")

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भाग-२  "तनहा है खुद तन्हाई "




भाग- १ यहाँ पढ़ें https://www.loverhyme.com/2018/05/blog-post_99.html 












रात हो चली.... मगर आँखों में नींद नहीं।  आज ४ दिन हो गए इसी तरह।

 दिमाग के घोड़े चल चल के थक गए हैं... शायद।

३ साल हो गए यहाँ मुझे, अम्माजी के यहाँ ... मगर कोई पैसे दे के तन्हाई भर गया, ये अजीब वाक़या पहले कभी नहीं हुआ...

लोग तो इन बंद चारदीवारों में खुद के बोझिल होते मन को   किसी और के जिस्म पे लादने भर आते।  आखिर क्यों?

मेरे दिमाग में इतने सवाल, पर कोई जवाब नहीं।  शायद आज नींद भी नहीं आएगी।  बिस्तर भी काट रहा ... बैठ के खिड़की से खाली आसमान ही देख लेती हूँ।

"दीदी ... सो जाओ ना ... अम्माजी गुस्सा करेंगी अगर सुबह आँखें सूजी हुई देखी उन्होंने ... "

वीना के खर्राटे शुरू हो चुके थे ... और मैं.... शायद मेरी आँखें खुल चुकी थी।


ज़िन्दगी कितनी अजीब है ना ... जब सब देती है तो अकल पे पत्थर पड़ जाते हैं और....  जब सब समझ आ जाए तब तक हाथ बंध चुके होते हैं।

अतीत की परछाईयाँ उस हिलते परदे के पीछे से लुका- छिपी खेलने लगी। 

काश उस दिन मैं, यूँही गुस्से में घर से न निकली होती …

घर वापसी ( भाग - १ "सब बिकता है")

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भाग - १  "सब बिकता है"





ज़िन्दगी न जाने किस क़र्ज़ का ब्याज मांग रही है? कुछ देर तन्हाई भी नहीं मिलती और... एक नयी सुबह रात की तरह आँखों -आँखों में गुज़र जाती है।

अम्मा एक नया ग्राहक लायी हैं। मुझे उसे खुश करने का कह गयी.


आईना भी जैसे बेपर्दा होके, मेरे जिस्म पे पिछली रात के रिसते हुए ज़ख्मों पे हँस रहा हो।

" ये क्या? मांग सूनी क्यों राखी तुमने? और गला.... अरे मंगलसूत्र पहना करो न!  इस तरह सादी मत रहा करो। " रत्नेश की आवाज़ कानो में घुल रही थी।

बिख़री यादों की अलमारी कभी सवरती  नहीं।  उनपे चढ़ी धूल कभी धुंधली नहीं होती।

ज़ोर की आवाज़ ने मेरी यादों की अलमारी आखिर कब बंद करवा दी पता ही न चला।

"दीदी दरवाज़ा खोलो... अम्माजी बोली बस आधा घंटा और... तैयार हो गयी क्या? दीदी?" वीना बाहर  दरवाज़ा फोड़ रही थी।

" बस हो ही गयी ... सुनना ... कुछ खाने को ला दे।  भूख लग आयी। ", मैं कह के गुसलखाने में तौलिये संग चल पड़ी।

ये बदनाम गली न जाने कितने नाम वालों को बाहें खोल बुला रही है ... "

बदनाम???"

एकाएक  मेरी हँसी फूट पड़ी।


तैयार होकर, कुछ फ़ीकी सी मुस्कान लि…

कब तक रूठोगे भला?

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दस बार उठे होंगे हाथ तुम्हे कुछ लिखने को,
पर दिल थम जाता है तेरा नाम ही लिखते... सुन रहे हो!

कोई लफ्ज़ लिखा जाता नहीं, स्याही शर्मा सी जाती है,
कागज़ को भी जैसे गुदगुदी हो जाती है.

हँस लेती हूँ सोच के तुम क्या आगे कहोगे?
मेरी नादानियों पे थोड़ा तंज़ कुछ तो कसोगे.

फ़ोन इक तरफ रख के ज़ोर से हँस लेती हूँ,
कुछ दिन और यूँ रूठी हुई रह लेती हूँ.

दो बार तो तुमसे फ़िर मुड़ मुलाक़ात की है,
इस तीसरी बार थोड़ा इत्मिनान रख लेती हूँ.

इस ख़ामोशी में तेरी जली-कटी फिर सुनलेती हूँ,
क्या करुँ ... तेरी बेरुख़ी सह लेती हूँ.

कुछ सुनने से सुनाना भला?
अरे कहो भी कुछ... कब तक रूठोगे भला?


Image:www.123RF.com


To be a Queen...

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I was brought up as a princess... and you know what that means?
It means, that I had all of my wishes come true... or to say ... all were made true by my dad.
I was handed over to a king... because a queen is said to belong to a king and not to anyone less.
So... I became a Queen!
A queen, infamous of required action, because my king was the ruler...and I, mere a spectator. But the reigns soon fell into my hands, when the king lost his life... and I had to become the king, inspite of being the rumoured- inefficient queen.
I bore no child so the kingdom was nevertheless my own family... they were my children and I their mother and this is what I assumed and failed miserably at.
Lost in the cascade of battles, I was torn like a piece of cloth and sold like meat. The buyer was...ofcourse a king and, I a hopeless slave.




I was held captive...not even given the status of a royal in prison but... a slave to whom the king could keep... as a war prisoner.

Life was never a burden before... but …

The unfamiliar...

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What do you think I want in all this? Practically speaking... I want all.

The all you have... as You.

I have heard people in love when they leave.... they leave a lot of themselves back in others...

Their ideologies....their way of talking...their specific and special terms of the language that they use and ofcourse how they used to respond to in any condition ....

They leave a part of themselves in the people they love and that is what makes it hard to forget them...because they seep into your DNA and become hard to part with...

I don't want  parts of me in you... I want to see you in you... I want to see how different you are...how different from me...how unique you are. I dont want the familiar side of you...I wanna see the unfamiliar...you..

 To mean... I want to learn you by your soul's fire.... I wanna embrace the unfamiliar you.


Image : www.datingcanvas.com

When clouds become flock of sheep...

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When clouds become flock of sheep... Your thoughts become fallen leaves... I dream about a weird tree... That is never green...


When dew drops load their weight on nights... Struggling to dilute as lights arise... Forming crystals of silver on broken leaves... Shining like diamonds bright.

Unwrapped day in buds of blue... Turning pots of uncooked stew... Flames of heat simmering then... To cook all day long then.


Propelled by the rising Sun... Increasing heights till up it hung... Then slowly sliding towards the end... In cool waters laying far at end.


The night dilutes its blue black ink Letting those trapped fireflies twinkle As the breeze sighs every now and then The moon stands still in masked silence.


Dreams emerge like ghosts Entering the sleeping corpses Touching their quiet hollowness Filling with sounds of forgotten voices.


When clouds become flock of sheep... Entering the borderless skies Your dreams they bring and take Across my uncountable nights.


Image www.123RF.com


Crawling shadows...

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I never knew how past would again and again torment me...the little child in me stays awake. Wanting someone to hold my hand and say," it's ok...am with you." 
The shadows howl at me, singing crazy songs of childhood lullabies; keeping me awake. I fight with my mind to sleep. Lights blind me, disclosing the faces of known ones...my own ones playing with me... destroying my joy of childhood.
Am alone in this body...no one to hear but me the screams of my helplessness...am alone to survive the pain and agony which I am unable to comprehend and produce the same in written words or spoken. But trust me...am dying each day with the guilt of something, that I haven't done but being the victim of which has been more tormenting...
It's like seeing myself each night...fighting to survive the hallucination... fighting to survive the death of my childhood... 
Am fighting to slow down growing...to be an adult...to understand the vanished phase between my childhood and youth…

We were never strangers...

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All the time, when we were near... We were never strangers.We were some old souls, soaked in our own warmth... in our own minds...on crossroads. Waving at each other... sharing smiles. 
We were never strangers, when we could feel how our hearts fluttered, in the crowd of two. We knew how much deep the darkness we have held inside...how much our lights have peeped inside, the cracks that were only scars and not fresh wounds...
We were  never strangers to the fact, that we were not even friends but we were also not enemies. We were strangers to ourselves...playing along the line... of ignoring our reflections in each other... we were two lonely souls, connected by a single smile. We were two wounded hearts, connected by a single dream. We were two stupid people, holding guns over each other... with only a bullet left in it.
We were never strangers...for we were the two lines of the single song...the song that was never audible to others, as they were deaf and we...we were two blind peo…

All you need to have.

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Sometimes, you fall in leaves and sometimes, you wait in morning dews... Love is planted in each heart, all have a heart but love happens to a Few...

Sometimes, you laugh in each flower and sometimes, you cry in rains... Love fulfils its purpose but all go through a similar pain...

Sometimes, you glow in the light and sometimes, you drown in the darkness... Love ignites a storm and also holds a calmness.

Sometimes, you know all answers and sometimes, you fear to question. Love makes all things clear but all you have is a big confusion...

Sometimes, Love is all you need... And sometimes, it is the only thing you have.

The Last Dance...

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As the music in the background plays... we both have the last dance. 
My eyes have already started to show... but your blank face hides all you want to, or may be it's my assumption.
My fingers tremble... brushing around your shoulder... I wanna hold you forever... 
My lips stop midway... saying don't go as I turn to look elsewhere...my tears slip down to my cheek, glistening in the lights...
The last dance with you shall end soon...
I want this moment to freeze... 
May this moment never end...as I close my eyes keeping my head on your chest, my sobs escape and the pinch in my heart kills me to say," I must go.... I must."

Image : bingee.com

It's time...

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May be it's time to leave... The dreams that I had been holding... In my eyes for long. They were of you, but I dont see them coming true in any time.
Some dreams should be left to shimmer on cheeks...they never become reality, but the reason of our sadness...
You were someone, whom I see and become happy, but I realise that slowly, you are eating away my smiles bit by bit....
It's hard to take all this anymore.... either stay or just go.... 
Whom am I talking to... you dont even know, how it feels to be in love with a memory, that has been carved out like a inscription...only to be fade... mildly each time, I sleep with tears in my eyes. 

Image: tiin.vn

I have lived...

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I have lived in your little 'nothings' , where you keep hiding little 'somethings... naughty sometimes scary.

I have lived inside your memories of the past and in your hopes of future.

I have lived in your dreams in closed eyes and thoughts in your awakened state.

I have lived in you... as you  and also me.
I have lived... only to live with you.

I have lived only to die... for you

I have lived in your words... following the trenches of the silences.

I have lived in your breaths... knocking on your heartbeats.

I have lived in your fears that have no tears and also in fears that flew down the aisle of the cheeks.

I have lived in the fun you ignore of life... and also in the risks you take unthinking.

I have lived in the lanes... in streets of darkness where you left your heart unknowingly.

I have lived in those corners of the sanctuary where you peeped for some solitude.

I have lived in your loneliness... in the crowds around you without telling you.

I have lived... many ti…

किताब में दिल ...

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किताबों में गुलाब कई बार मिलने की बातें होती हैं.... पर क्या कभी किसी का दिल भी किताब में मिला है???

मुझे मिला है... कभी धड़कन की आवाज़ आयी, तो कभी साँसों की खुशबू... प्यार की गिरफ्त होती ही ऐसी है... ऐसी लिपटती है, कि जान बन जाती है... 

क्या कभी जान भी रूठती है???

सांसें बेज़ार हो जाएँ, तो धड़कनें उन गिरवी सोने के बुंदों (झुमकों) की तरह हो जाती हैं... जिन्हें ना पहन सकते हैं और न ही, पैसे चुकाने तक नींद आती है।

मेरा भी कुछ,ऐसा ही हाल रहा... जब तक दिल को तसल्ली नहीं हुई, कि जो दिल में आ चुका, वो ज़िन्दगी भर का हमसफ़र - हमराही ही होगा, मैं भी बेचैन और डरी हुई सी रही।

उस किताब का ज़िक्र कर रही हूँ... जो मेरी ज़िन्दगी की, तस्वीर सी बन चुकी है... लाइब्रेरी में मिलते थे छुप के... इक किताब में सवाल पूछते थे... और जवाब जिसका दूसरी किताब में होता था...

एक पर्ची पे सवाल का पेज नंबर और किताब का नाम लिख के, एक दूसरे को दे देते थे क्लास के बाद... और जवाब की पर्ची ,अगले दिन... किसी और किताब में।  
आखिर ये सिलसिला तब टूटा, जब लाइब्रेरियन के हाथ इक किताब लगी, जिसमें गलती से सवाल की पर्ची रह गयी थी।  और हम द…

Shiva and Shakti...

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You were always there....timeless and in form and in the formless.... 
I was there, unaware of the bond we had.


You made me power; called me Shakti....detached to the attached you were, yet so sublimely inclined. In thoughts of mine, you prevailed....though unknown to me, as a close one...known. A stranger at every step yet my soulmate all the time.







When once I faced you...my heart knew, it was you from times ago mine...yet I was bound to believe that you can never be mine. 








Your one gaze made me love you...the love which existed but never was made true.

The night of our reunion went without your claiming me.... instantly I was hurt....bleeding my heart in the nights.







But how could Shakti be devoid of her Shiva ever...I reached you, called you....you became mine. I knew that I would burn...my human structure would become a corpse one night....but then I was always yours....death cannot make us part anytime.







From the half male-half female(Ardhnarishwar)...to the universe you hold inside...























Yo…

A Promise...

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It's a promise that you love me...
It's a promise that i love you...

But better are which become vows...
And making our hearts bow...

The forever in the making...
The eternity in a life...

A promise is a token...
A formality of words from the heart.

That I shall never let your part...
Part away from my heart...

Even if for the rest of my life ...
I close my eyes.

A promise... a vow...
A musical note...

Carrying love.
Of Me and You.


Image: ibtimes.co.in

Happy Chocolates Day...

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#chocolateday #lovelikeyou #iloveyouchocolate #love #yqbaba
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A Thousand Times....I LOVE YOU

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A thousand times...
I had told myself that, someone somewhere belongs to me.
I didnt know for sure...
But my heart repeated it has to be you.
What-ifs always stopped me...
But then, heart resolved to yell at me.
For once should I want you...then why not to say.

I Love You







A hundred times...
I told myself that someone too waits for me.
Somewhere, under the same sky...
Counting stars in a puzzled way.
What-ifs always stopped me...
And buts, always interrupted the themes.
But then for a moment, my heart stopped beating
When I was about to say.

I Love You









Just one time, I didnt hear my heart...
And only looked into your eyes...
My fallen dew, my dreams came true...
And out of darkness, shinning bright ...
All was you... and all is you...
Until my last breath.

I Love You


image:blogs.davenportlibrary.com
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